Chanakya Niti : जो मनुष्य निश्चित को छोड़कर अनिश्चित के पीछे भागता है, उसका कार्य या पदार्थ नष्ट हो जाता है।
Chanakya Niti : जो मनुष्य निश्चित को छोड़कर अनिश्चित के पीछे भागता है, उसका कार्य या पदार्थ नष्ट हो जाता है।
जो मनुष्य निश्चित को छोड़कर अनिश्चित के पीछे भागता है, उसका कार्य या पदार्थ
नष्ट हो जाता है।
बल्कि जो भी उपलब्ध हो गया है, उसी में सन्तोष करना चाहिए। जो व्यक्ति आधी छोड़कर
पूरी के पीछे भागते हैं, उनके हाथ से आधी भी निकल जाती है।
वरयेत् कुलजां प्राज्ञो विरूपामपि कन्यकाम्।
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