Chanakya Niti : विद्या की प्राप्ति निरंतर अभ्यास से होती है।

Chanakya Niti : विद्या की प्राप्ति निरंतर अभ्यास से होती है।

अभ्यासाद्धार्यते विद्या कुलं शीलेन धार्यते। 
गुणेन ज्ञायते त्वार्यः कोपो नेत्रेण गम्यते।। 

Chanakya about Importance of practice


विद्या की प्राप्ति निरंतर अभ्यास से होती है। अभ्यास से ही विद्या फलवती होती है। उत्तम गुण और स्वभाव से ही कुल का गौरव और यश स्थिर रहता है। श्रेष्ठ पुरुष की पहचान सद्गुणों से होती है। मनुष्य की आंखें देखकर क्रोध का ज्ञान हो जाता है। 

 जिन व्यक्तियों को उत्तम विद्या प्राप्त करनी है, वे निरंतर प्रयत्न करते हैं। वे यदि बारबार अभ्यास न करें तो विद्या की प्राप्ति असंभव होती है। किसी कुल का स्थिर होना, उसका यश फैलना, उसका प्रसिद्ध होना, गौरव की दृष्टि से देखा जाना आदि उसके उत्तम गुण, कर्म और स्वभाव के कारण ही होता है। यदि गुण, कर्म और स्वभाव श्रेष्ठ नहीं होंगे तो कुल का गौरव नहीं बढ़ सकता। इसी प्रकार श्रेष्ठ व्यक्ति की पहचान उसके अच्छे गुणों के कारण होती है। किसी व्यक्ति के क्रोधित होने का ज्ञान उसकी आंखें देखकर हो जाता है, क्योंकि क्रोध के कारण व्यक्ति की आंखें लाल हो जाती हैं।


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