Chanakya Niti : स्त्रियों का सौंदर्य उनका पतिव्रता होना है ।

Chanakya Niti: स्त्रियों का सौंदर्य उनका पतिव्रता होना है ।

Chanakya about what is women's beauty.

कोकिलानां स्वरो रूपं स्त्रीणां रूपं पतिव्रतम्। 
विद्या रूपं कुरूपाणां क्षमा रूपं तपस्विनाम्।। 

कोयल का सौंदर्य उसके स्वर में है, उसकी मीठी आवाज में है, स्त्रियों का सौंदर्य उनका पतिव्रता होना है, कुरूप लोगों का सौंदर्य उनके विद्यावान होने में और तपस्वियों की सुंदरता उनके क्षमावान होने में है। 

भाव यह है कि व्यक्ति का सौंदर्य उसके गुणों में छिपा रहता है। जिस प्रकार कोयल और कौआ दोनों काले होते हैं, परंतु कोयल की मीठी कूक सभी को पसंद होती है, यही मीठा स्वर उसका सौंदर्य है, इसी प्रकार स्त्रियां वे ही सुंदर मानी जाती हैं, जो पतिव्रता होती हैं अर्थात स्त्री का सौंदर्य उसका पातिव्रत धर्म है। समाज में भी पति-परायणा स्त्री को ही सम्मान प्राप्त है, उसी की लोगों द्वारा सराहना की जाती है। शरीर से कुरूप व्यक्ति भी विद्या के कारण आदर का पात्र बन जाता है जैसे सत्यवती पुत्र व्यास। तप करने वाले व्यक्ति की शोभा उसकी क्षमाशीलता के कारण होती है। महर्षि भृगु ने 'क्षमा' करने की विशेषता के कारण ही श्रीविष्णु को देवताओं में श्रेष्ठ घोषित किया था।


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