Chanakya Niti : व्यक्ति काल के प्रभाव से नहीं बच सकता है।

Chanakya Niti : व्यक्ति काल के प्रभाव से नहीं बच सकता है। Chanakya niti

कालः पचति भूतानि कालः संहरते प्रजाः। 
कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः।।

Chanakya about time


समय सब प्राणियों को अपने पेट में पचा लेता है अर्थात सबको नष्ट कर देता है। काल ही सबकी मृत्यु का कारण होता है। जब सब लोग सो जाते हैं, तो काल ही जागता रहता है। इसमें संदेह नहीं कि काल बड़ा बलवान है। काल से पार पाना अत्यंत कठिन है। 

व्यक्ति काल के प्रभाव से नहीं बच सकता है, जीवों सहित सभी वस्तुएं काल के प्रभाव से नष्ट हो जाती हैं। सबके सो जाने पर भी वह काल जागता रहता है। काल चक्र सृष्टि के आरंभ से लेकर प्रलय काल तक चलता रहता है कभी नहीं रुकता। जो उसकी उपेक्षा करता है, काल (समय) उसे पीछे छोड़कर आगे निकल जाता है। काल हम सबके साथ ऐसे खेलता है जैसे शिकार बने चूहे के साथ बिल्ली क्रीड़ा करती है। 

न पश्यति च जन्मान्धः कामान्धो नैव पश्यति। 
न पश्यति मदोन्मत्तो ह्यर्थी दोषान् न पश्यति।। 

जन्म से अंधे को, कामांध को और शराब आदि के नशे में मस्त व्यक्ति को कुछ दिखाई नहीं देता। स्वार्थी व्यक्ति की भी यही स्थिति है क्योंकि वह उस व्यक्ति के दोषों को देख नहीं पाता, जिससे उसके स्वार्थों की पूर्ति होती हो। 


Download PDF: Chanakya niti Book { Hindi } | सम्पूर्ण चाणक्य नीति free pdf

Download PDF

टिप्पणियाँ