Chanakya Niti : -प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संकट तो आते ही हैं।

Chanakya Niti: प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संकट तो आते ही हैं।

Chanakya about problems

कस्य दोषः कुले नास्ति व्याधिना को न पीडितः।
 व्यसनं केन न सम्प्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम्।।

 संसार में ऐसा कौन-सा कुल अथवा वंश है, जिसमें कोई-न-कोई दोष अथवा अवगुण न हो, प्रत्येक व्यक्ति को किसी-न-किसी रोग का सामना करना ही पड़ता है, ऐसा मनुष्य कौन-सा है, जो व्यसनों में न पड़ा हो और कौन ऐसा है जो सदा ही सुखी रहता हो, क्योंकि प्रत्येक के जीवन में संकट तो आते ही हैं। 

 आचार्य चाणक्य ने यह बात ठीक ही कही है कि कोई विरला ही वंश अथवा कुल ऐसा हो, जिसमें किसी प्रकार का दोष न हो। इसी तरह सभी व्यक्ति कभी-न-कभी किसी रोग से पीड़ित होते हैं। जो मनुष्य किसी बुरी लत में पड़ जाता है अथवा जिसे बुरे काम करने की आदत पड़ जाती है, उसे भी दुख उठाने पड़ते हैं। संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिसे सदा सुख ही मिलता रहा हो और संकटों ने उसे कभी न घेरा हो। अर्थात कोई मनुष्य पूर्ण नहीं। कोई न कोई दुख सभी को लगा ही हुआ है।


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